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कुंभ में कल्पवासियों का कल्पवास शुरु, ये हैं कठिन नियम


RAGHVENDRA CHAURASIA 22/01/2019 12:45:32 173 Views


Pryagraj. कुंभ पर्व के द्वितीय पौषपूर्णिमा स्नानपर्व से संगम की रेती पर जप-तप साधना के अभ्यास का अनुष्ठान कल्पवास शुरु हो गया है। देश व विदेश के लोगों ने रेती पर कुटिया सजाई है। डुबकी लगाने के बाद गंगाजल लेकर अपने तीथपुरोहित से कल्पवास का संकल्प लिया। इसके साथ ही तुलसी का पौधा रखकर पूजन किया और जौं भी बोया गया। 

Kumbh Me Kalpwasiyon Ka Kalpwas Shuru

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  इन कठिन नियमों के बीच कल्पवास

कुंभ की धरती पर कल्पवास शुरु हो गया है। गंगा के किनारे कल्पवास रहने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। कुंभ में द्वितीय पौषपूर्णिमा से कल्पवास का आरंभ होता है। कल्पवासी माघी पूर्णिमा तक दो या तीन समय स्नान, एक ही समय भोेजन करेंगे। तीर्थपुरोहित राजेंद्र पालीवाल के मुताबिक वह भूमि पर ही शयन करेंगे और आग सहित सुविधा की तमाम चीजों से भी दूर रहेंगे। लोहे का पिंजड़ा निशान वाले तीर्थपुरोहित अनुज के शिविर में कल्पवास आरंभ करने वाले नेपाल के ​कपिलवस्तु से पत्नी संग आए गणेश थापा बोले कल्पवास में मन को नई ऊर्जा और शांति मिलती है। अंडमान से आए बब्बन पांडेय ने कहा कि रेती का सुख आलौकिक है। 

Kumbh Me Kalpwasiyon Ka Kalpwas Shuru

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Web Title: Kumbh Me Kalpwasiyon Ka Kalpwas Shuru ( Hindi News From Newstimes)


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