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दीपावली पर इन बातों व शुभ मुहूर्त का रखें ध्यान, पूजा होगी सफल


ABHIMANYU VERMA 07/11/2018 12:26:37 112 Views


Lucknow. लोग आज दीपोत्सव यानी दीपावली का त्योहार मना रहे हैं। इसे रोशनी के त्योहार के नाम से भी जाना जाता है। ये पर्व हर साल हिंदू तिथि के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन की रात्रि वर्ष की सबसे ज्यादा अंधकारमय रात्रि होती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान राम लंका के राजा रावण का वध करके और चौदाह वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या वापस लौटे थे। इस खुशी में अयोध्या की प्रजा ने अपने-अपने घरों में घी का दीपक जलाकर जश्न मनाया था। 

The right method of Deepawali worship and auspicious time

इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और ऋद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है, इस दिन माता लक्ष्मी रात्रि के वक्त भ्रमण करती हैं वहीं, जो भक्त माता लक्ष्मी को प्रसन्न करता है उसके घर में सुख समृद्धि आती है। इसके लिए आपको पूजन की विधि का खास ध्यान रखना चाहिए। 

  दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजन की विधि

सर्वप्रथम माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं को चौकी पर स्थापित करें। प्रतिमाओं को स्थापित करते इस बात का खास ध्यान रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर हो। साथ माता लक्ष्मी जी की प्रतिमा गणेशजी के दाहिनी ओर रहें। तत्पश्चात कलश को लक्ष्मीजी की प्रतिमा के पास चावलों पर रखें और नारियल को लाल वस्त्र में लपेट कर उसे कलश पर रखें। बता दें कि यह कलश वरुण का प्रतीक होता है। 

इसके बाद घी का दीपक भगवान गणेश और तेल का दीपक लक्ष्मी जी के समक्ष रखें और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं की चौकी के समक्ष एक और चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र को बिछाएं। तत्पश्चात उस लाल वस्त्र पर चावल से नवग्रह बनाएं। ध्यान रहे कि घर में पूजन करते समय नवग्रह ना रखें। रोली की सहायता से स्वास्तिक एवं ॐ का चिह्न भी बनाएं।

इस बात का ध्यान रखें कि पूजा करने के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें और इसके बाद केवल प्रदोष काल में ही माता लक्ष्मी की पूजा करें। आपको बता दें कि लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में ही करना चाहिए और प्रदोष काल का समय संध्याकाळ के बाद शुरू होगा।

लक्ष्मी पूजन के समय लक्ष्मी मंत्र का उच्चारण करते रहें- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:

प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करना सर्वोत्तम माना जाता है। स्थिर लग्न में पूजन कार्य करने से मां लक्ष्मी घर में वास करती हैं माता की स्तुति और पूजा के बाद दीप दान भी अवश्य करें।

  दीपावली पर पूजन का शुभ मुहूर्त

वैसे तो यह पूरा दिन ही शुभ माना जाता है। इस दिन किसी भी समय पूजन कर सकते हैं, किन्तु प्रदोष काल से लेकर निशाकाल तक समय अतिशुभ होता है। जो लोग इस दिन बही बसना पूजन करते हैं उन्हें राहु काल का ध्यान रखना चाहिए, वहीं, जो लोग सिर्फ गणेश-लक्ष्मी जी का पूजन कर रहे हैं। वह किसी भी वक्त पूजन कर सकते हैं। अमावस्या तिथि पर राहु काल का दोष नहीं होता। अतिशुभ मुहूर्त की बात की जाये तो........  

अमावस्या तिथि समाप्त- 7 नवम्बर 2018 रात 9:32 बजे,

  शुभ मुहूर्त का समय

प्रातः 8 बजे से 9:30 बजे तक 

प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक 

दोपहर 1:30 बजे से सायंकाल 6 बजे तक 

सायंकाल 7:30 बजे से रात्रि 12:15 बजे तक

  स्थिर लग्न

वृष सायंकाल 6:15 से रात्रि 8:05 तक 

सिंह रात्रि 12:45 से 02:50 तक 

वृश्चिक प्रातः 8:10 से 9:45 तक 

कुम्भ दोपहर 01:30 से 03:05 तक

Web Title: The right method of Deepawali worship and auspicious time ( Hindi News From Newstimes)


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